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कैंसर की गिरफ्त में छोटे बच्चे भी, भारत में हर रोज 50 से ज्यादा की मौत





नई दिल्ली। जानलेवा बीमारी कैंसर की गिरफ्त में अब छोटे छोटे बच्चे भी आ रहे हैं। भारत में प्रति दिन कैंसर से 50 से ज्यादा बच्चों की मौत हो रही है। अध्ययन के मुताबिक एक महीने से 14 साल की उम्र के बच्चे कैंसर का शिकार हो रहे हैं। सरकार इस घातक बीमारी से निपटने के दावे करती है। लेकिन हकीकत ये है कि कैंसर से निपटने के लिए देश में आवश्यक सुविधाओं की भारी कमी है।

दिल्ली-कोलकाता में प्रोस्टेट कैंसर का सबसे ज्यादा खतरा

निम्न मध्य आय के लोगों पर असर

ग्लोबल ऑनकोलॉजी में प्रकाशित शोध पत्रों के अनुसार भारत में निम्न मध्य आय ग्रुप के लोगों पर इस बीमारी का ज्यादा असर है। कैंसर से निपटने के लिए सरकारी नीतियों को जिम्मेदार बताया गया है। विकसित देशों में अस्सी फीसद से ज्यादा कैंसर प्रभावित मरीजों को इलाज के जरिए जीवनदान मिल जाता है लेकिन भारत में जानकारी की कमी, लोगों की कम आय और सरकार की समेकित नीति में कमी की वजह से बच्चे और किशोरों की असमय मौत हो जाती है।

प्रति 10 लाख लोगों में 37 की मौत

टोरंटो विश्वविद्यालय और मुंबई स्थिति टाटा मेमोरियल सेंटर के अध्ययन में ये जानकारी सामने आयी है कि भारत में प्रति 10 लाख लोगों में 37 लोगों की पेट के कैंसर की वजह से मौत हो रही है। शोधकर्ताओं के मुताबिक भारत में कैंसर से होने वाली मौतों की एक बड़ी वजह इस बीमारी की गंभीरता और इससे लड़ने के लिए तैयार की गयी नीतियों में कमी है।


अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक कैंसर हॉर्ट अटैक और डायबीटिज से निपटने के लिए सरकार मल्टी सेक्टोर पॉलिसी पर काम कर रही है। सरकार ने इन बीमारियों से होने वाली मौतों में अाने वाले 10 सालों में 25 फीसद की कमी लाने की कोशिश में जुटी हुई है।

कैंसर की भयावहता तेजी से फैल रही है। लैंसेट की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में प्रत्येक साल 10 लाख से ज्यादा लोगों में कैंसर के लक्षण देखे जा रहे हैं। विश्न स्वास्थय संगठन के मुताबिक साल २०२५ तक इसमें करीब पांच गुना बढो़तरी हो जाएगी। कैंसर की वजह से देश की अर्थव्यवस्था पर भी बुरा असर पड़ रहा है।

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